गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुदुचेरी: देश के 3 राज्यों असम, केरल और पुदुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होना है। इन तीनों राज्यों में जहां सत्ता पक्ष अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं विपक्ष वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहा है। असम और पुदुचेरी में जहां बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए सत्ता में है, वहीं केरल की सत्ता पर वाम मोर्चा का कब्जा है और सूबे में उसकी मुख्य लड़ाई कांग्रेस से मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस बार तीनों ही राज्यों में दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
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असम में बीजेपी की ‘हैट्रिक’ पर नजर
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए होने वाले चुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच माना जा रहा है। बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है, जबकि कांग्रेस 2016 में सत्ता गंवाने के बाद वापसी की कोशिश कर रही है। इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई, नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया, एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल और राइजोर दल के नेता अखिल गोगोई जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

राज्य के 35 जिलों में 31,490 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। करीब 2.50 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जिनमें 1.25 करोड़ महिलाएं और 318 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। पार्टीवार देखें तो कांग्रेस ने 99, बीजेपी ने 90 और एआईयूडीएफ ने 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी के सहयोगी असम गण परिषद 26 और बीपीएफ 11 सीटों पर मैदान में हैं। अन्य दलों में आम आदमी पार्टी 18, तृणमूल कांग्रेस 22, यूपीपीएल 18 और जेएमएम 16 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि 258 निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं।
असम विधानसभा चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व सीमित है, और इस बार कुल 59 महिला उम्मीदवार ही मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस ने 14 और बीजेपी ने 7 महिलाओं को टिकट दिया है। प्रमुख मुकाबलों में जालुकबाड़ी सीट से मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, जोरहाट में गौरव गोगोई, नाजिरा में देबब्रत सैकिया और शिबसागर में अखिल गोगोई के मुकाबले पर सबकी नजर है। चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है और सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात किए गए हैं। इस बार 6.42 लाख नए मतदाता, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 2.50 लाख लोग और 2.05 लाख दिव्यांग मतदाता भी हिस्सा ले रहे हैं।
केरल में कड़े मुकाबले की उम्मीद
केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए भी गुरुवार को एक ही चरण में मतदान होगा। यहां कुल 2.71 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। केरल में चुनाव मैदान में 883 उम्मीदवार हैं। राज्य में मुकाबला मुख्य रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा यानी कि LDF और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यानी की UDF के बीच है, जबकि बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का प्रयास कर रहा है। वह अपने 10 साल के कामकाज जिनमें बुनियादी ढांचा, कल्याणकारी योजनाएं और संकट प्रबंधन शामिल हैं, को चुनावी मुद्दा बना रहा है। हालांकि, एलडीएफ को सत्ता विरोधी लहर और हाल के चुनावों में मिली चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यूडीएफ सरकार के खिलाफ असंतोष और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाकर सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहा है।

यूडीएफ ने वाम मोर्चे पर बीजेपी से मिलीभगत और SDPI जैसे संगठनों से संबंध रखने के आरोप भी लगाए हैं। दूसरी ओर, बीजेपी राज्य में पिछले चुनावों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है और खुद को एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के विकल्प के रूप में पेश कर रही है।
पुदुचेरी में भी काफी अहम है मुकाबला
असम और केरल के साथ-साथ पुदुचेरी में भी चुनावी माहौल गरम है और गुरुवार को यहां भी वोट डाले जाएंगे। पुदुचेरी में मुख्य मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगियों तथा बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के बीच है। छोटा राज्य होने के बावजूद यहां की राजनीति काफी दिलचस्प मानी जाती है। पुदुचेरी में चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रख पाती है या बीजेपी यहां अपनी स्थिति और मजबूत कर पाती है।
सत्ताधारी NDA में AINRC 16 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, और उसकी सहयोगी BJP 10 निर्वाचन क्षेत्रों में तथा AIADMK एवं LJK 2-2 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव मैदान में हैं। विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन ने सीटों के बंटवारे को लेकर लंबी बातचीत के बाद, कांग्रेस को 16 निर्वाचन क्षेत्र आवंटित करने, DMK को 13 और VCK को एक (उझावरकराई) सीट देने पर सहमति जताई। कुल मिलाकर इन तीनों राज्यों में गुरुवार को जनता विभिन्न सियासी दलों को मुकद्दर को ईवीएम में कैद कर देगी।